Success is the Balance of Product, Customer & Communication



बिज़नेस में 3 बहुत जरूरी घटक हैं - पहला आपका प्रोडक्ट, दूसरा आपका कस्टमर और तीसरा आपके प्रोडक्ट के बारे में कस्टमर से किया जाने वाला कम्युनिकेशन ।

कई लोग ऐसे हैं जो प्रोडक्ट पर बहुत फोकस करते हैं, लेकिन कम्युनिकेशन और कस्टमर पर ज्यादा ध्यान नहीं देते । कई लोग सिर्फ हवा हवाई कम्युनिकेशन करते हैं लेकिन प्रोडक्ट पर बिल्कुल फोकस्ड नहीं होते ।

मेरे एक परिचित हैं, बहुत ही शानदार सुगंधित प्रोडक्ट बनाते हैं । वो इस बिज़नेस में दूसरी जनरेशन हैं । प्रोडक्ट भी इतने दुर्लभ कि जो एक बार उपयोग कर ले, दुबारा ढूंढता है । लेकिन उनका कम्युनिकेशन वाला हिस्सा बहुत कमजोर है । हालांकि इसके कई कारण हैं, पहला तो वो संतुष्ट हैं, कि यार जितना चाहिए उससे ज्यादा दे रखा है भगवान ने । दूसरा कारण, थोड़े अड़ियल हैं और सफलता का थोड़ा घमंड भी है, कि लोग क्वालिटी के कारण चलकर आते हैं उनका माल लेने के लिए । तीसरा, उनको लगता है कि प्रोडक्ट खुद चलकर बिक रहा है अपनी शर्तों पर, तो किसी के पास चलकर क्यों जाना, उनकी शर्तों पर माल देना पड़ेगा । इसके चलते वो कम्युनिकेशन करते ही नहीं अपने कस्टमर के साथ..और अपने को एक दायरे में सीमित कर रखा है ।

प्रोडक्ट पर पूरा ध्यान देने के बाद भी, कस्टमर फोकस्ड एप्रोच ना होने के कारण, उनका बिज़नेस सीमित है । कुल मिलाकर उनका जितना टर्नओवर है, मुझे लगता है कि वो थोड़े से प्रयासों से 10 या 20 गुना हो सकता है ।

यानी, जो आदमी राजा बन सकता था, वो मंत्री पद से ही खुश है ।

मैं सैकड़ों बिज़नेस ओनर्स से निजी तौर पर बात करता हूं और अलग अलग तरह के अनुभवों से गुजरता हूँ । कई लोग ऐसे हैं जो ये कहते हैं, भाई बहुत साइलेंट काम है अपना । ज्यादा झमेले की अपने को जरूरत ही नहीं है । वो एक तरह से पीछे रहकर, अपने प्रोडक्ट के दम पर अपना काम करना चाहते है । काम बढ़ाना है लेकिन उसे एक्सेप्ट नहीं कर पाते । कस्टमर से कम्युनिकेशन का कोई सेट मॉडल नहीं है । एक रिटेलर के माइंड से काम कर रहे हैं, जो आ गया उससे बात कर ली, माल दे दिया, बस ।

और दूसरा वर्ग ऐसा है जो कम्युनिकेशन या मार्केटिंग पर 100 रुपया खर्च करने से पहले ये सोचता है कि ये 100 रुपये की रिकवरी हाथों हाथ होगी या नहीं ।

कम्युनिकेशन स्थापित करने की ये दोनों ही बड़ी प्रॉब्लम हैं ।

मार्केटिंग/ब्रांडिंग में आपका 80-90 परसेंट बजट waste ही होता है और सिर्फ 10-20% ही आपको 100% इन्वेस्टमेंट के बदले return दे रहा होता है । लेकिन कौनसा 10-20% बजट आपको कस्टमर तक पहुंचा रहा है इस विषय की समझ बहुत मुश्किल काम है । और शायद ही दुनियां में किसी को इस मैकेनिज्म का पता है । इसके लिए, पहला, आपको ब्रांडिंग/मार्केटिंग का हर तरीका अपनाना होगा, पता नहीं कौनसा तरीका कारगर होगा । धीरे धीरे एक पैटर्न आपको पता लगने लगता है जिसके हिसाब से आप बजट एडजस्ट कर सकते हैं ।

दूसरा, रिलायंस जैसा बड़ा उद्यम भी एक ब्रॉडबैंड कनेक्शन के लिए 4 लोगों को आप के आफिस भेज देता है । इससे मुकेश अम्बानी कोई छोटा थोड़े ही हो जाता है । अगर बड़ा होना है तो कस्टमर तक पहुंचना ही होगा ।

मार्केटिंग और ब्रांडिंग के लिए आपको एक बजट असाइन करना होता है, शुरुआत में बिना रिटर्न्स की उम्मीद रखे । आपके टर्नओवर का एक निश्चित प्रतिशत । FMCG ब्रांड्स के लिए तो ये बहुत जरूरी है । किस प्रयास के परिणाम कब और कैसे मिलेंगे, आपको नहीं पता, लेकिन मिलेंगे ये निश्चित है ।

मेरे पास कल महाराष्ट्र से एक फ़ोन आया कि "आपके 2016 के exhibition में मुम्बई आया था, आपके यहाँ से एक कैलेंडर मिला था जो मैंने संभाल कर रखा है । आपके प्रॉडक्ट्स चाहिये" । मैं समझ गया कि उन्हें उस कंपनी से बात करनी थी जिस ने वो कैलेंडर स्पांसर किया था । मैंने उनका अभिप्राय समझ कर उस कंपनी का नंबर दिया । किसी एक कंपनी का 2016 में किया गया ब्रांडिंग प्रयास, आज भी उनको रिजल्ट्स देने की क्षमता रखता है, वर्ष 2020 में । पिछले 4 वर्षों में उस कैलेंडर के बूते, मेरे पास ऐसे 20-30 लोगों के फ़ोन आये हैं, उस कंपनी के लिए । उस कंपनी के पास सीधे कितने आये होंगे, आप समझ सकते हैं ।

इतनी लंबी पोस्ट लिखने का मतलब ये है कि जिन भी बिज़नेस का फोकस सिर्फ प्रोडक्ट पर है, उनको प्रोडक्ट से ऊपर उठकर अपने बिज़नेस के लिए अपने कस्टमर से कम्युनिकेशन सेटअप करने का मॉडल बनाना चाहिए । ये कम्युनिकेशन किसी भी फॉर्म में हो सकती है, अपने प्रोडक्ट की अच्छाई बताने से लेकर, नये प्रोडक्ट की जरूरत समझना, प्रोडक्ट के बारे में फीडबैक, कस्टमर की प्रॉब्लम समझकर उसे दूर करने की इच्छाशक्ति तक । क्योंकि सफल वही है जिसने प्रोडक्ट, कस्टमर और कम्युनिकेशन को बैलेंस किया हुआ है ।

Written by - Deepak Goyal

Editor - Incense Media Group

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